We News 24 » रिपोर्टिंग सूत्र / दीपक कुमार
नई दिल्ली :- अरविंद केजरीवाल द्वारा तिहाड़ जेल से बाहर आते ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। केजरीवाल ने इस्तीफे के साथ ही नवंबर में विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है, जिससे चुनावी सियासत तेज हो गई है।
केजरीवाल ने कहा, ‘अगर आपको लगता है कि मैं ईमानदार हूं, तो मुझे बड़ी संख्या में वोट दें. मैं चुने जाने के बाद ही सीएम की कुर्सी पर बैठूंगा. चुनाव फरवरी में होने हैं. मेरी मांग है कि नवंबर में महाराष्ट्र चुनाव के साथ ही चुनाव कराए जाएं. चुनाव होने तक पार्टी से कोई और मुख्यमंत्री रहेगा. अगले 2-3 दिनों में विधायकों की बैठक होगी, जिसमें अगले सीएम पर फैसला होगा.’
आम आदमी पार्टी (AAP) इसे एक मास्टर स्ट्रोक मान रही है, जो पार्टी के पक्ष में भावनात्मक समर्थन को बढ़ावा देगा। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे एक राजनीतिक स्टंट बता रही है। विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि यदि केजरीवाल जल्द चुनाव चाहते हैं, तो विधानसभा भंग करने की सिफारिश क्यों नहीं की गई।AAP केजरीवाल के कदम को सबसे बड़ी कुर्बानी करार दे रही है जबकि बीजेपी इसे मजबूरी में लिया गया फैसला बता रही है. उन शर्तों को गिना रही है, जो जमानत देते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल पर लगाई थी कि न तो बतौर सीएम न तो केजरीवाल ऑफिस जा पाएंगे और न ही सरकारी फाइलों पर दस्तखत कर पाएंगे.
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केजरीवाल के इस कदम का हरियाणा चुनावों पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। हरियाणा के हिसार खेड़ा गांव से ताल्लुक रखने वाले केजरीवाल का इस्तीफा हरियाणा में एक सहानुभूति कार्ड के रूप में देखा जा सकता है, जिससे AAP को वहां समर्थन मिल सकता है। इस्तीफे के बाद केजरीवाल को पूरी तरह से चुनाव प्रचार का समय मिलेगा, जिससे वह अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
दिल्ली में इस्तीफे के बाद नया मुख्यमंत्री चुनने का फैसला जल्द ही लिया जाएगा, लेकिन मौजूदा सरकार का कार्यकाल फरवरी 2025 तक है, जिससे इस समयावधि में किसी भी नए मुख्यमंत्री के लिए काम करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उससे पहले ही बड़ा उलटफेर कर केजरीवाल ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है.
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